वसंतभाई पुरोहित के बारे में

वसंतभाई का जन्म 1966 में बनासकांठा में एक किसान परिवार में हुआ।

वह 16 वर्ष की आयु तक आलवाड़ा, पांथावाडाऔर धानेरा जैसे गांवों के पास अपने पैतृक गांव रवि में रहते थे और अध्ययन करते थे। वह उच्च शिक्षा के लिए पालनपुर गए।

एक युवा लड़के के रूप में, वह हमेशा राष्ट्र के महान देशभक्तों की कहानियों से प्रेरित थे और मातृभूमि की प्रगति के लिए काम करने का सपना देखते थे। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की राष्ट्रवादी भावना और दृष्टि से विशेष रूप से प्रेरित और प्रभावित थे और पालनपुर में इसके सक्रिय सदस्य बने। यह कदम उनके जीवन का एक ऐसा कदम था जिसने उनका जीवन सदा के लिए परिवर्तित कर दिया एवं उन्हें भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व की प्रभावशाली यात्रा की और उन्मुख किया।

वह आरएसएस स्वयंसेवक में से एक थे और राम जनमभूमि आंदोलन और एकतायात्रा में सामूहिक आंदोलन का हिस्सा थे। 1990 के दौरान गुजरात की राजनितिक उथल – पुथल ने स्थापित जनों के भाग्यों को पलट डाला और भाजपा राज्य में कांग्रेस के सामने मुख्य एवं एकमात्र विपक्षी पार्टी बन के उभरी।

परिवार का इतिहास

श्री वसंतभाई पुरोहित का जन्म 1964 में बनासकांठा के एक किसान गुजराती परिवार में श्रीमती होजिबेन और श्री रणछोड़भाई पुरोहित के यहाँ हुआ।

वे राजस्थान से मूल रूप से राजपुरोहित हैं। बाद में, सिद्धपुर में सिद्धराज जयसिंह की अवधि के दौरान, उन्होंने हवन के लिए सर्वश्रेष्ठ पुजारियों (सिरोही – राजस्थान) को बुलाया और फिर उन्होंने गुजरात में बसने के लिए कुछ गांव दिए। तब से, यह समुदाय गुजरात और राष्ट्र के विकास में योगदान दे रहा है।

उनके दादाजी ने अपने गांव एवं नजदीकी कसबों में न्यायिक व्यवस्था स्थापित की और उनके पिता श्री रणछोड़भाई भी अपने गांव रवि में सर्वस्वीकृति से सरपंच चुने गये थे।

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बचपन

बचपन से, वसंतभाई एक कड़ी महेनतकश थे और खेती में अपने पिताजी को मदद भी करते थे।

गांव में और अध्ययन के अवसर नहीं हैं, इसलिए वे स्कूल जाने के लिए हर दिन कई किलोमीटर चलते हैं।

धानेरा शहर के लोगों को बेहतर शिक्षा और बेहतर सेवा देने के लिए वसंतभाई राजनीति में प्रवेश किया।